Saturday, July 27, 2019

मेरी खुशी का राज

मेरे खुशी का न वजह है न राज
बेवजह ही खुश हूँ फिर भी बताता हूँ राज

मैं खुश हो जाता हूँ मिला इस जन्म से
दिन की थकान से रात की आराम से
भोर की उत्साह से संध्या आश से
सूरज की किरणों से चाँद रोशनी से
चाँदनी की चमक से जुगनुओं  दमक से
वृक्ष की शाख से पत्तियो की अहसास से
फूलो की ख़ुशबू से फलों की मिठास से
पक्षी की चहक से भौरों की गुंजन से
बहती नदी  से स्थिर ताल से
कोयल की कुक से  मोर की नाच से
गलियो की शोर से वनों की वीरान से
ऊंचे पहाड़ों से गिरते झरनों से
बारिश की बूंदों से धूप की तपन से
ठंड की ठिठुरन से ओश की शीतलन से

किसानों की मेहनत से लहराते फसलो से
होली की गुलालों से दीवाली की दीयो से
रमजान की रोजा से क्रिसमस की प्रेयर से
वतन के रखवालों से चमन के दीवानों से
कश्मीर की वादी से बंगाल की खाड़ी से

पिता की डाँट से माँ की दुलार से
परिवार के प्यार से दोस्तो के साथ से
बच्चों की बचपन से बूढों की बुढापा से
जवानों की जवानी से नानी की कहानी से

स्कूल की यादों से कॉलेज की अहसासों से
नये ख्वाब से नये राह से
हार की पछतावा से जीत के जश्न से
कल की सबक से आज की सुधार से

उनकी लहराते बालो से बजती पाजेब से
खनकती चूडियों से माथे की बिंदियों से
हिरनी सी चाल से झील सी आंख से
सुंदर रूप से मीठी बोल से
सब मे छिपा है मेरी खुशी का राज

अगर आप भी खुशी का वजह ढूंढ रहे हो तो अपने आस पास टटोलिये आपको भी खुशी का कोई न कोई वजह मिल ही जायेगा।
         








Tuesday, July 23, 2019

आज मैं कुछ कर जाऊँ

आज मैं कुछ कर जाऊँ
हालातों से आगे बढ़ जाऊँ
धीमा हूँ पर रुका नहीं
हार के अभी थका नहीं

तकदीर के भरोसे क्यूँ मैं बैठूँ
कर्म के कलम से अपना भाग्य लिखूँ
साहस  है मुझमे बधाओं से लड़ जाऊँ
जग में अपना नाम मैं कर जाऊँ

जीत के लिए जन्म लिया तो
हार को क्यूँ स्वीकार करूँ
हो जितनी बाधा पथ पर
मैं संघर्ष के लिए तैयार रहूँ

जब नए ख्वाब है मुझको बुनना
तो दूसरों से क्यूँ आश लगाऊँ
अपना हक अपने नाम मैं कर जाऊँ
ख्वाब को पूरा करने में जी जान लगा दूँ

पर्वत सा दृढ़ संकल्प और
सागर सा वेग लिए बढ़ता जाऊँगा
आज नही तो कल मंजिल को पाऊँगा
जब पहुँचूँगा मैं मंजिल पर
सब हालात आसान नजर आएँगे
न चाहने वाले भी मुझसे अपना नाता जोड़ेंगे

उस दिन का मैं भाग्यनिर्माता बन जाऊँ
आज मैं कुछ कर जाऊँ
हालातों से आगे बढ जाऊँ
हालातों से आगे बढ़ जाऊँ


Tuesday, July 9, 2019

बारिश का मौसम

बारिश का मौसम सच मे कितना मनभावन मौसम है, पहली बारिश की बूंदे ऐसी लगती है मानो मेघ रूपी सीप धरा की श्रृंगार के लिए मोती रूपी  बूंदों की बारिश कर रही हो, बारिश के आगमन से प्रकृति का नया रूप स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
        बरसात में प्रकृति की सुंदरता अपनी चरम सीमा पर होती चहुँ ओर हरियाली ही हरियाली होती है,आकाश में चमकने वाली दामिनी की प्रतीति हिमालय पर्वत में पवन की  प्रवाह से नृत्य करती हुई नीलगिरी और मेघ के तीव्र आवृति की गरज अत्यंत भयावह के साथ सुहावन दृश्य का माहौल बनाता है
        कोयल की कुहू कुहू की मधुर ध्वनि से मंत्रमुग्ध हो कर मोर नृत्य करने लगती है,दादुर भी गर्मी की व्याकुलता से अब बारिश की शीतलता का आनंद ले रहा होता है ।
    जैसे ही बारिश की बूंदे उस नव बीज पर पड़ी उसमे से अंकुर प्रस्फुटित होकर नवचार जीवन का प्रसार होने लगती है।मिट्टी की सौंधी सौंधी महक समस्त वातावरण को सुगंधमय बना रही है मानो धरती बारिश के स्वागत में इत्र का भेंट कर रही हो।
जब बारिश की बूंदे धरती पर गिरती हुई ऐसी प्रतीत होती है जैसे बूंदो के रुप में मोतियों की असंख्य लड़ियाँ निःसृत हो रही हो
    नदी ताल अपने चरम आवेग से प्रवाहित होती हुई मार्ग की समस्त बाधाओं को पार करती हुई सागर मिलन को इस तरह बढ़ी है मानो कोई विरही विरह की तपन से व्याकुल असंख्य बेड़ियों को तोड़ बस पिया मिलन को भागी जा रही हो
   बारिश के मौसम में आने वाला सावन मास पवित्र मास माना जाता है इस भक्तिमय मास मर शिव की मन्दिरो की घंटी और शंखनाद  स्वतः ही लोगो को भक्तिमय रंग में सराबोर कर लेती है। धीमी-धीमी बारिश की फव्वारे इस प्रकार निःसृत हो रही हो मानो शिव जी अपने जटा खोल गंगा की पवित्र अमृत धारा के रूप में अपने भक्तों पर कृपा की बरसात कर रहा हो ।
    बारिश के आगमन से किसान के मायूश मुख पर ख़ुशी ऐसी लगती है मानो देव राजेन्द्र साल भर की खुशियां एक साथ दे दी हो।
  बारिश के पानी में छोटे छोटे  बच्चों का छप छप चलना, कीचड़ में सराबोर होना और कागज की नाव चलाते देख अपने बचपन को फिर से जीने की  ललक जाग उठती है। सच मे बारिश का मौसम बेहिसाब खुशियां और नये जीवन देने वाला होता है।