Tuesday, December 31, 2019

नए साल का आगाज करें

इक उमर  बीत चली इक नई  साल के साथ 
नई  ख्वाब  नई अहसास के साथ 

बीता साल अब यादों में सिमट जायेगा 
कुछ यादें दिलों में बस जायेगा 

किसी के हुए सपने पूरे किसी के है अधूरे 
किसी से हुआ प्यार तो किसी से तकरार 

कुछ रिश्ते नए है जुड़े कुछ अपने है छूटे 
कुछ बिन मांगे मिले कुछ ख्वाहिशे दिल में ही छूपे 

कई अजनबियों से हुई पहचान 
कोई  जान के भी बने है अनजान  

कुछ खुशियों के पल मुस्कान लाएगी 
कुछ गम के पल आँख नम कर जाएगी 

बीता साल अब वापस ना आएगा 
सब यादें ख्वाब के पन्नो में सिमट जायेगा 

वक्त है नए सपने बुनने का 
जो अधूरा है उसे पूरा करने का 

छोड़ के सब गीले शिकवे प्यार का हाथ बढ़ायें 
नई संकल्प नई उत्साह के साथ नई शुरुवात करें 

आओ मिलकर नए साल का आगाज करें 
आओ मिलकर नए साल का आगाज करें 




Saturday, July 27, 2019

मेरी खुशी का राज

मेरे खुशी का न वजह है न राज
बेवजह ही खुश हूँ फिर भी बताता हूँ राज

मैं खुश हो जाता हूँ मिला इस जन्म से
दिन की थकान से रात की आराम से
भोर की उत्साह से संध्या आश से
सूरज की किरणों से चाँद रोशनी से
चाँदनी की चमक से जुगनुओं  दमक से
वृक्ष की शाख से पत्तियो की अहसास से
फूलो की ख़ुशबू से फलों की मिठास से
पक्षी की चहक से भौरों की गुंजन से
बहती नदी  से स्थिर ताल से
कोयल की कुक से  मोर की नाच से
गलियो की शोर से वनों की वीरान से
ऊंचे पहाड़ों से गिरते झरनों से
बारिश की बूंदों से धूप की तपन से
ठंड की ठिठुरन से ओश की शीतलन से

किसानों की मेहनत से लहराते फसलो से
होली की गुलालों से दीवाली की दीयो से
रमजान की रोजा से क्रिसमस की प्रेयर से
वतन के रखवालों से चमन के दीवानों से
कश्मीर की वादी से बंगाल की खाड़ी से

पिता की डाँट से माँ की दुलार से
परिवार के प्यार से दोस्तो के साथ से
बच्चों की बचपन से बूढों की बुढापा से
जवानों की जवानी से नानी की कहानी से

स्कूल की यादों से कॉलेज की अहसासों से
नये ख्वाब से नये राह से
हार की पछतावा से जीत के जश्न से
कल की सबक से आज की सुधार से

उनकी लहराते बालो से बजती पाजेब से
खनकती चूडियों से माथे की बिंदियों से
हिरनी सी चाल से झील सी आंख से
सुंदर रूप से मीठी बोल से
सब मे छिपा है मेरी खुशी का राज

अगर आप भी खुशी का वजह ढूंढ रहे हो तो अपने आस पास टटोलिये आपको भी खुशी का कोई न कोई वजह मिल ही जायेगा।
         








Tuesday, July 23, 2019

आज मैं कुछ कर जाऊँ

आज मैं कुछ कर जाऊँ
हालातों से आगे बढ़ जाऊँ
धीमा हूँ पर रुका नहीं
हार के अभी थका नहीं

तकदीर के भरोसे क्यूँ मैं बैठूँ
कर्म के कलम से अपना भाग्य लिखूँ
साहस  है मुझमे बधाओं से लड़ जाऊँ
जग में अपना नाम मैं कर जाऊँ

जीत के लिए जन्म लिया तो
हार को क्यूँ स्वीकार करूँ
हो जितनी बाधा पथ पर
मैं संघर्ष के लिए तैयार रहूँ

जब नए ख्वाब है मुझको बुनना
तो दूसरों से क्यूँ आश लगाऊँ
अपना हक अपने नाम मैं कर जाऊँ
ख्वाब को पूरा करने में जी जान लगा दूँ

पर्वत सा दृढ़ संकल्प और
सागर सा वेग लिए बढ़ता जाऊँगा
आज नही तो कल मंजिल को पाऊँगा
जब पहुँचूँगा मैं मंजिल पर
सब हालात आसान नजर आएँगे
न चाहने वाले भी मुझसे अपना नाता जोड़ेंगे

उस दिन का मैं भाग्यनिर्माता बन जाऊँ
आज मैं कुछ कर जाऊँ
हालातों से आगे बढ जाऊँ
हालातों से आगे बढ़ जाऊँ


Tuesday, July 9, 2019

बारिश का मौसम

बारिश का मौसम सच मे कितना मनभावन मौसम है, पहली बारिश की बूंदे ऐसी लगती है मानो मेघ रूपी सीप धरा की श्रृंगार के लिए मोती रूपी  बूंदों की बारिश कर रही हो, बारिश के आगमन से प्रकृति का नया रूप स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
        बरसात में प्रकृति की सुंदरता अपनी चरम सीमा पर होती चहुँ ओर हरियाली ही हरियाली होती है,आकाश में चमकने वाली दामिनी की प्रतीति हिमालय पर्वत में पवन की  प्रवाह से नृत्य करती हुई नीलगिरी और मेघ के तीव्र आवृति की गरज अत्यंत भयावह के साथ सुहावन दृश्य का माहौल बनाता है
        कोयल की कुहू कुहू की मधुर ध्वनि से मंत्रमुग्ध हो कर मोर नृत्य करने लगती है,दादुर भी गर्मी की व्याकुलता से अब बारिश की शीतलता का आनंद ले रहा होता है ।
    जैसे ही बारिश की बूंदे उस नव बीज पर पड़ी उसमे से अंकुर प्रस्फुटित होकर नवचार जीवन का प्रसार होने लगती है।मिट्टी की सौंधी सौंधी महक समस्त वातावरण को सुगंधमय बना रही है मानो धरती बारिश के स्वागत में इत्र का भेंट कर रही हो।
जब बारिश की बूंदे धरती पर गिरती हुई ऐसी प्रतीत होती है जैसे बूंदो के रुप में मोतियों की असंख्य लड़ियाँ निःसृत हो रही हो
    नदी ताल अपने चरम आवेग से प्रवाहित होती हुई मार्ग की समस्त बाधाओं को पार करती हुई सागर मिलन को इस तरह बढ़ी है मानो कोई विरही विरह की तपन से व्याकुल असंख्य बेड़ियों को तोड़ बस पिया मिलन को भागी जा रही हो
   बारिश के मौसम में आने वाला सावन मास पवित्र मास माना जाता है इस भक्तिमय मास मर शिव की मन्दिरो की घंटी और शंखनाद  स्वतः ही लोगो को भक्तिमय रंग में सराबोर कर लेती है। धीमी-धीमी बारिश की फव्वारे इस प्रकार निःसृत हो रही हो मानो शिव जी अपने जटा खोल गंगा की पवित्र अमृत धारा के रूप में अपने भक्तों पर कृपा की बरसात कर रहा हो ।
    बारिश के आगमन से किसान के मायूश मुख पर ख़ुशी ऐसी लगती है मानो देव राजेन्द्र साल भर की खुशियां एक साथ दे दी हो।
  बारिश के पानी में छोटे छोटे  बच्चों का छप छप चलना, कीचड़ में सराबोर होना और कागज की नाव चलाते देख अपने बचपन को फिर से जीने की  ललक जाग उठती है। सच मे बारिश का मौसम बेहिसाब खुशियां और नये जीवन देने वाला होता है।


Wednesday, April 10, 2019

नानकुन मोर गाँव(part-2)

बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

महतारी कस मया करोइया महानदी 
अउ ददा कस दुलार करोइया हसदेवा 
सुखावत हे
दाई ददा के मया ह अब तरसावत हे

बड़ रोना मोला आवत है
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

धरम करम के नाम म ए पारा ओ पारा बटवारा होवत हे
भई भई के ऊपर बैरी बान चलावत हे
पूरा गाँव खास ले अब आम होवत जावत हे

 बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

गांव के देवी देवता मन के,अब न मान हे
छापर ठाकुर अउ सिद्ध बाबा,अब नाव के ही भगवान ए

तइहा के बात ला बइहा लेगे सब बात सिरतोन होवत हे
अब तो बबा मन घलो स्मार्ट फोन चलावत हे

बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

गांव के चिन्हारी गिरजा बंगला अउ हिरवा ओनहारी,नंदवात हे सब बारी- बारी
लीम पीपर घलो चुंदावत हे,सब बेजा कब्जा ल अपनावत हे,

बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

कहा पाबे खेड़ा बिहि,अब हिरवा ह नंदवात हे
 सब के दुख म कांदा भाजी ह घलो मउलावत हे

 बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

ज़िहा होवय नारी के सम्मान
उहा होवत हे मार गारी अउ अपमान

भोला भाला किसान अब दारू ल धरकावत हे
चउक चबूतरा म ओकरेच गोठ ल गोठियावत हे

बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

गाँव के भविष्य अब बूड़त जावत हे
सियान ल देख के अब लइका ह घलो
दारू गुटका बीड़ी सिगरेट ल सुलगावत हे

गाव के छुर्रु कबड्डी अउ रेसटीप नंदवात हे
अब व्हाट्सएप्प  अउ टीकटोक म समय बितावत हे
बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

सब किसान कर्जा म बुड़त जावत हे
सोन कस भुइँया कौड़ी के भाव म बेचावत हे
किसान मन के हालत अउ बिगड़त जावत हे

बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

अब परकृति घलो सतावत हे
कुआ बउली ह अंटावत हे

फसल ल छरपा रोग त कभू माहो ल खवावत हे
दु फसली धान बोवैया ल, अब धर धर रोवावत हे

बड़ रोना मोला आवत हे
पहली के मौहाडीह नंदावत हे

By Dinu suman patel







Monday, April 8, 2019

नानकुन मोर गाँव हे (part-1)

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

जिहा महतारी कस मया करोइया महानदी हे
अउ ददा कस दुलार करोइया हसदेवा हे
ऐसे पावन भुइँया म बिराजे मोर गांव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

सुमिरव गांव के नागू,ठाकुर अउ छापर बाबा
संगम म बिराजे हे हमर सिद्ध बाबा
हमर गांव के इही हरे काशी अउ काबा
जय हो जय हो गाँव के भोले बाबा

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

भंडार म सिलादेही के सतबहिनिया दाई
रक्सेल म सोनियाडीह गांव हे
उत्ती म किकिरदा के विशेसरी माई
अउ बुडती म केरा के चंडी दाई हे
सब के कोरा म बिराजे ऐसे मोर गांव हे मौहडीह जेकर नाव हे 2


नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

मौहडीह मरार मन के गांव ए
साग भाजी कमाना ओकर काम ए
इहा के ग्वांर सुनसुनिया, अउ कांदा भाजी लाजवाब हे
संग म बिही अउ खेड़ा म घलो, बड़ मिठास हे
ऐसे मोर गांव हे,मौहडीह जेकर नाव हे 2

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे


अंग्रेज मन के गिरजा बंगला अउ बाबा तरिया इहा के चिन्हारी ए
नदिया के तीरे तीर हिरवा के ओन्हारी हे
लीम पीपर के रुख, घरो घर खोल बारी हे
ऐसे मोर गांव के चिन्हारी हे

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

नवधा भागवत हो या नवरात
सबो मिल के करथन जी शुरुवात
चार घर के रउत एक घर बाम्हन 
सबो मिल जुल के तिहार ल मनाथन

भोला भाला हे किसान इहाँ के
अपन रद्दा जाथे अपन रद्दा आथे
नई करय भेद भाव ककरो से
मिल जुर के खेत खार म कमाथे

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

कैसे करव मैं बखान,सब हे इहाँ महान
सियान के हे मान, त नारी के सम्मान
सबो गावत है मौहडीह के गुणगान

इहा परकृति घलो महेरबान हे
 दु फसली लगथे ईहाँ धान हे
कोदो कुटकी पीपर के खवइया
अब बेचत बोरा-बोरा धान हे

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे

इहा के सड़क नई बनिस त का होगे
धुर्रा चिखला माटी हमर पहिचान होगे
कभू आहा हमर गांव भुलाहा झन दिनु हे मोर नाव
ऐसे है मोर गांव मौहडीह जेकर नाव

नानकुन मोर गाँव हे
मौहडीह जेकर नाव हे









अब घर आजा सजन

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

कैसे करव जतन
अब नई सुहाये मोला ये तन
जब ले गए तै सजन
बिछड़े लागे जैसे जनम जनम

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

दिन गिन गिन तोर रद्दा देखेव
न तै आये,न तोर संदेशा आये
सावन बीते भादो बीते,बीत के अब पतझड़ आये
तभो ले निर्मोही, तोला दया नइ आये

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

तोर बिना सुन्ना लागे कोला बारी
नइ सुहावत हे घर दुआरी
तोर सूरता म दिन दिन सुखावत हे चोला
अब तै झन तड़पा मोला

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

संदेशा लेके आये हे पुरवइया
आने वाला है मोर सवरिया
घुमड़ घुमड़ बरसो रे बदरिया
सबो मिलके गाओ ददरिया

अब आहि मिलन के घड़ी
अब टुटही मोर बिरहा के बेड़ी
अब आने वाला हे मोर सजन
लगे है मोला मिलन के लगन

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन










भौजी के दीवाना भैया

भैया मने मन मुस्कवात हे
भौजी के मया ह दीवाना बनावत हे

नवा नवा फेसन ला अपनावत हे
जीन्स ला माड़ी भर कटवा के
टी शर्ट संग टसमा घलो लगावत हे

भैया  मने मन मुस्कवात हे
भौजी के मया ह दीवाना बनावत हे

नास्ता के बहाना भौजी ल देखे जावत हे
पूड़ी सब्जी अउ समोसा ला मंगावत हे
तभो ले भैया के मन भौजीच ऊपर जावत हे

भैया मने मन मुस्कवात हे
भौजी के मया ह दीवाना बनावत हे

एक नज़र देखे बर भैया फ़ोटो घलो खिंचवावत हे
भैया ला देख भौजी ह लुकावत हे

भैया मने मन मुस्कवात हे
भौजी के मया ह दीवाना बनावत हे

भैया,संगी ला बतियावत हे
हमर प्रेम ला मत बताहा कहीके समझावत हे

संगी हव्हाट्सएप ग्रुप म सबो ल बतावत हे
अउ दिनु ह भैया के प्रेम ला गांव म फैलावत हे

भैया  मने मन मुस्कवात हे
भौजी के मया ह दीवाना बनावत हे


ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है ...

ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है
न  दिन, न रात हमे कुछ भाता है

जब से तू है रूठा 
मैं बन गया जग में झूठा
हाल ए दिल किसे सुनाऊ मैं
सब है हमसे रूठा-रूठा

ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है
न दिन, न रात हमे कुछ भाता है

आज कल खुद को अकेला पाता हूँ
स्वयं को एक हारा हुआ पाता हूँ
इसीलिए मैं सबसे दूर चला जाता हूँ

ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है
न दिन, न रात हमे कुछ भाता है

दास्तां ए दिल सुनाऊँ  किसे
सब है अपने मे रीझे

इसलिये दास्तां ए दिल, कागज पे उतार देता हूँ
और अपने जख्मो पर,मरहम भी लगा लेता हूँ

ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है
न दिन, न रात हमे कुछ भाता है

आज फिर वो दिन आया है,
निरासा ने मुझे फिर से रुलाया है
करूँ क्या समझ नही आया है
क्योंकि वक्त ने फिर से सताया है

ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है
न दिन, न रात हमे कुछ भाता है

मैं हूँ नही कवि या शायर 
बस हाल ए दिल बया करता हूँ
इसलिए मैं कलम कागज साथ लिए फिरता हूँ

ऐ वक्त क्यूँ हमसे रूठा है
न दिन, न रात हमे कुछ भाता है


तुम्हारी याद हमे आई है

आज फिर क्यूँ उदासी छाई है
तुम्हारी याद हमें आयी है

याद तेरी पल-पल सताती है
जब-जब मैं, तेरे पास हूँ जाता 
तू हमसे दूर ही, नजर आती  है

ये तो है भरम मन का
दूर तुम हमसे नही
बस हम ही थम सा गये है

आज क्यूँ उदासी छाई है
तुम्हारी याद हमें आयी है

चाहत तो है तुम्हे पाने की,
पर डर भी सताती है तुम्हे खोने की
क्या करूँ कहा जाऊ कुछ समझ नही आता है
बिन तेरे जीवन,बेरंग सा नजर आता है

आज क्यूँ उदासी छाई है
तुम्हारी याद हमें आयी है

जब से वक्त है हमसे रूठा 
तब से बन गए हम जग में झूठा
हाल ए दिल हम किसे सुनाये
जब सब है हमसे रूठा-रूठा

आज क्यूँ उदासी छाई है
तुम्हारी याद हमें आयी है

आज कल खुद को अकेला पाता हूँ
साथ मे सब है पर सब को दूर पाता हूँ
बस तुम्हे पाना ही, है लक्ष्य मेरा
 कर लेना तुम भी इंतज़ार मेरा

आज क्यूँ उदासी छाई है
तुम्हारी याद हमें आयी है

मुश्किल है राह तुम्हे पाने की
है साहस भी,इस जग से लड़ जाने की
अब सिर्फ वक्त का है इंतज़ार 
जब जी भर के,करूँगा तेरा दीदार

आज क्यूँ उदासी छाई है
तुम्हारी याद हमें आयी है


नित सुबह करो कुछ काम

नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |

प्रभाकर से सीखो, नित ऊर्जावान रहो |
सीख सरिता से, नित गतिमान बनो |
ओस की बूंदे देती यह संदेशा,
तुम रहो शांत हमेशा |

नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |

खग ने अब पर है फैलाई,
निल गगन में भरने को गहराई |
सीख खग से लक्ष्य ऊँचा रखना,
लक्ष्य के प्रति समर्पण करना |


नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |

सागर के गहराई से, मोती वही पाता है
जो लहरो से नही घबराता है |
तू सीख सागर से,गुणों को समेटे रखना
और वक्त में गुणों को मंथन करना |

नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |

देख हिमालय को कैसे ,अडिग है खड़ा 
निष्छल भाव से स्थिर है पड़ा |
सीख हिमालय से, लक्ष्य पर अड़े रहना
चाहे हो लाख मुसीबत चट्टान सा डटे रहना |

नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |

है यौवन तुझमे, तरुणाई का ज्वार उठा
आलस का त्याग कर कर्म का भार उठा |
कर्म से तू अपना भाग्य बना,
जग में अपना नाम कमा |

नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
नित सुबह करो कुछ काम
जग में बनो तुम महान