Tuesday, July 23, 2019

आज मैं कुछ कर जाऊँ

आज मैं कुछ कर जाऊँ
हालातों से आगे बढ़ जाऊँ
धीमा हूँ पर रुका नहीं
हार के अभी थका नहीं

तकदीर के भरोसे क्यूँ मैं बैठूँ
कर्म के कलम से अपना भाग्य लिखूँ
साहस  है मुझमे बधाओं से लड़ जाऊँ
जग में अपना नाम मैं कर जाऊँ

जीत के लिए जन्म लिया तो
हार को क्यूँ स्वीकार करूँ
हो जितनी बाधा पथ पर
मैं संघर्ष के लिए तैयार रहूँ

जब नए ख्वाब है मुझको बुनना
तो दूसरों से क्यूँ आश लगाऊँ
अपना हक अपने नाम मैं कर जाऊँ
ख्वाब को पूरा करने में जी जान लगा दूँ

पर्वत सा दृढ़ संकल्प और
सागर सा वेग लिए बढ़ता जाऊँगा
आज नही तो कल मंजिल को पाऊँगा
जब पहुँचूँगा मैं मंजिल पर
सब हालात आसान नजर आएँगे
न चाहने वाले भी मुझसे अपना नाता जोड़ेंगे

उस दिन का मैं भाग्यनिर्माता बन जाऊँ
आज मैं कुछ कर जाऊँ
हालातों से आगे बढ जाऊँ
हालातों से आगे बढ़ जाऊँ


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