Monday, April 8, 2019

अब घर आजा सजन

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

कैसे करव जतन
अब नई सुहाये मोला ये तन
जब ले गए तै सजन
बिछड़े लागे जैसे जनम जनम

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

दिन गिन गिन तोर रद्दा देखेव
न तै आये,न तोर संदेशा आये
सावन बीते भादो बीते,बीत के अब पतझड़ आये
तभो ले निर्मोही, तोला दया नइ आये

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

तोर बिना सुन्ना लागे कोला बारी
नइ सुहावत हे घर दुआरी
तोर सूरता म दिन दिन सुखावत हे चोला
अब तै झन तड़पा मोला

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन

संदेशा लेके आये हे पुरवइया
आने वाला है मोर सवरिया
घुमड़ घुमड़ बरसो रे बदरिया
सबो मिलके गाओ ददरिया

अब आहि मिलन के घड़ी
अब टुटही मोर बिरहा के बेड़ी
अब आने वाला हे मोर सजन
लगे है मोला मिलन के लगन

अब घर आजा सजन 
नइ लागे तोर बिना मन










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