नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
प्रभाकर से सीखो, नित ऊर्जावान रहो |
सीख सरिता से, नित गतिमान बनो |
ओस की बूंदे देती यह संदेशा,
तुम रहो शांत हमेशा |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
खग ने अब पर है फैलाई,
निल गगन में भरने को गहराई |
सीख खग से लक्ष्य ऊँचा रखना,
लक्ष्य के प्रति समर्पण करना |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
सागर के गहराई से, मोती वही पाता है
जो लहरो से नही घबराता है |
तू सीख सागर से,गुणों को समेटे रखना
और वक्त में गुणों को मंथन करना |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
देख हिमालय को कैसे ,अडिग है खड़ा
निष्छल भाव से स्थिर है पड़ा |
सीख हिमालय से, लक्ष्य पर अड़े रहना
चाहे हो लाख मुसीबत चट्टान सा डटे रहना |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
है यौवन तुझमे, तरुणाई का ज्वार उठा
आलस का त्याग कर कर्म का भार उठा |
कर्म से तू अपना भाग्य बना,
जग में अपना नाम कमा |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
नित सुबह करो कुछ काम
जग में बनो तुम महान
जग में बनो तुम महान |
प्रभाकर से सीखो, नित ऊर्जावान रहो |
सीख सरिता से, नित गतिमान बनो |
ओस की बूंदे देती यह संदेशा,
तुम रहो शांत हमेशा |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
खग ने अब पर है फैलाई,
निल गगन में भरने को गहराई |
सीख खग से लक्ष्य ऊँचा रखना,
लक्ष्य के प्रति समर्पण करना |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
सागर के गहराई से, मोती वही पाता है
जो लहरो से नही घबराता है |
तू सीख सागर से,गुणों को समेटे रखना
और वक्त में गुणों को मंथन करना |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
देख हिमालय को कैसे ,अडिग है खड़ा
निष्छल भाव से स्थिर है पड़ा |
सीख हिमालय से, लक्ष्य पर अड़े रहना
चाहे हो लाख मुसीबत चट्टान सा डटे रहना |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
है यौवन तुझमे, तरुणाई का ज्वार उठा
आलस का त्याग कर कर्म का भार उठा |
कर्म से तू अपना भाग्य बना,
जग में अपना नाम कमा |
नित सुबह करो कुछ काम,
जग में बनो तुम महान |
नित सुबह करो कुछ काम
जग में बनो तुम महान
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